Friday, 7 July 2017

तूफ़ान कम नहीं गुजरे







इस जमीं से तूफ़ान कम नहीं गुजरे
आबाद रहे बियाबान नहीं गुजरे

कोई उसे गूंगा बनाए लिए चलता है
इंसान का ये अपमान नहीं गुजरे

दिवास्वप्न दिखाने वाले कम तो नहीं  
पतझड़ में वसंत का अवसान नहीं गुजरे

लहरों से क्या हिसाब मांगने निकले
डूबे हैं तट पर अपमान नहीं गुजरे

फरेबी चालों में अब तक नहीं उलझे
कोई अभिमन्यु चक्रव्यूह से नहीं गुजरे  
    
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